उद घाटन भाषण

(मा० सुश्री कुमारी मायावती, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)

 

 

आज के इस पहली बार निर्वाचित सदस्यों के प्रशिक्षण/प्रबोधन कार्यक्रम में दिशा-निर्देश देने के लिए आये हुए हमारे अतिथिगण, माननीय अध्यक्ष, विधान सभा और सभी नवनिर्वाचित विधायकगण | गौरवशाली परम्पराओं वाले उत्तर प्रदेश के इस ऐतिहासिक सदन में आप पहली बार निर्वाचित होकर आये हैं इसके लिए मैं आप सभी का हार्दिक स्वागत करती हूँ और आपको हार्दिक बधाई भी देती हूँ | यह हम सभी के लिए बहुत सौभाग्य और गौरव की बात है कि प्रदेश की लगभग १६ करोड़ जनता ने बड़ी आशाओं और विश्वास के साथ हमें इस गरिमामय सदन के सम्मानित सदस्य के रूप में अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है | अभी माननीय अध्यक्ष जी का स्वागत भाषण हुआ | उन्होंने हमें याद दिलाया कि सदनों की स्वतंत्रता और गरिमा बनाये रखने का वास्तविक दायित्व निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों पर है | आज संसद और राज्यों के विधान मण्डल अपनी गरिमा और स्तर को बनाये रखने के लिए जिस दौर से गुजर रहे हैं उसमें सदस्यों के लिए ऐसे प्रबोधन कार्यक्रमों की सार्थकता और भी बढ़ जाती है  इसका महत्व और भी बढ़ जाता है | विधायक का कर्त्तव्य केवल विधान सभा तक ही सीमित नहीं होता है बल्कि विधान सभा के बाहर भी उसकी कुछ जिम्मेदारियां और दायित्व होते हैं | यदि वह उन जिम्मेदारियों और दायित्वों को समझते हैं और उन्हें भली-भांति प्रतिपादित करते हैं तो यह समझा जाना चाहिये कि वह प्रभावशाली विधायक हैं | इसलिए जरूरी है कि हम सदन की प्रक्रिया नियमावली और परम्पराओं और शिष्टाचार को भली-भांति समझ लें | हमारे जो माननीय सदस्य पहले भी इस सदन में रह चुके हैं वे इसकी गरिमा से परिचित हैं | जो माननीय सदस्य पहली बार इस सदन में चुन कर आये हैं वह एक बहुत  महत्वपूर्ण परम्परा से जुड़ रहे हैं | इस सदन की गरिमा को हम सभी को मिलकर न सिर्फ संजोकर रखना है बल्कि उसे बढ़ाना भी है | यह एक बड़ी जिम्मेदारी है | और मैं विश्वास करती हूँ कि इसे निभाने में सभी सहयोगी बनेंगे | जनप्रतिनिधि के रूप में यह आपका यह दायित्व है कि समाज के गरीब,  दलित, मेहनतकश, मजदूर, अल्पसंख्यक एवं पिछड़े वर्ग के लोगों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से सदन में रखें और आपकी यह कोशिश हो कि यह वर्ग विकास कार्यक्रमों की मुख्यधारा से जुड़ सके ताकि उन्हें सम्मान और गरिमा से जीने का सुअवसर मिल सके | इस प्रदेश ही नहीं बल्कि इस पूरे देश के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अपने संघर्ष और अपनी विद्वता और प्रदेश की महान जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से गहरा प्रभाव डालने वाले बड़े-बड़े नेता इस सम्मानित सदन के सदस्य रहे हैं जिन्होंने लोकतांत्रिक परम्पराओं और आदर्शों का पालन करते हुए समाज के दबे-कुचले, गरीब और दलित वर्गों का जीवन बेहतर बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है | लोकतंत्र में चुनाव राजनीतिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग है | जो लोग माननीय सदन में चुनकर आये हैं उन्हें जनता ने बड़ी आशा, विश्वास और आस्था के साथ यहां भेजा है | हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम लोगों के इस विश्वास के अनुरूप एक ऐसी व्यवस्था का साधन बनें जो प्रदेश की महान जनता की आकांक्षाओं, उम्मीदों तथा भावनाओं को सही मायने में प्रतिबिम्बित कर सके | यह सदन ऐतिहासिक परिवर्तनों, सामाजिक विकास तथा आर्थिक उत्थान का महत्वपूर्ण माध्यम है और इस सदन के हर सदस्य को इस कार्य में सशक्त भूमिका निभानी होती है | पिछले कुछ समय से कई लोगों का कहना है कि माननीय सदन में वाद-विवाद का स्तर पहले जैसा नहीं रहा है | यह आलोचना कुछ सही कुछ गलत है | गलत इसलिए है कि हर किसी का चिन्तन और अभिव्यक्ति का तरीका फर्क होता है | हमारे विधान सभा का सामाजिक स्वरूप अब पहले से पूरी तरह से भिन्न हो गया है | वह वर्ग और समुदाय जो पहले सदन में आने से वंचित रहते थे वह अब बड़ी संख्या में सदस्य बन गये हैं | यह संभव है कि वह उतने मुखर न हों लेकिन उनका सामाजिक समस्याओं से सरोकार कहीं अधिक गहरा और वास्तविक है | उनके बात कहने का तरीका फर्क हो सकता है लेकिन उनकी भावनायें सच्ची और जन हितैषी होती हैं | यह जरूर है कि हमारे सभी सदस्यों को वाद-विवाद के स्तर को ऐसा रखना चाहिये जो व्यक्तिगत न हो और जिससे किसी भी व्यक्ति या वर्ग की भावनाओं को ठेस न पहुँचे | उसके लिए हमें भाषा का संयम और व्यवहार की शालीनता अपनानी होगी | मैं विश्वास करती हूँ कि इस माननीय सदन के सभी सदस्य इस बात का पूरा ध्यान रखेंगे | मैं एक बात यह भी आपके सामने रखना चाहती हूं कि दूसरे राज्यों के माननीय सदनों में पिछले कुछ वर्षों में अपने विवाद भी सामने आये हैं | आप सभी जानते हैं कि जहां तक हमारी पार्टी का सवाल है हमने तत्काल जरूरी कार्यवाही की है | मैं इस मा० सदन के सम्मानित सदस्यों से आशा करती हूँ कि जनहित के सवाल उठाते समय वह मन में किसी भी तरह के व्यक्तिगत या सामाजिक राग द्वेष, लोभ को जगह नहीं देंगे | इसके साथ ही वह यह भी याद रखेंगे कि उनके किसी भी आचरण या व्यवहार से इस सम्मानित सदन की गरिमा धूमिल न हो | किसी भी व्यवस्था के लिए अनुशासन सबसे ज्यादा जरूरी होता है | यह बहुत खेद की बात है कि दलीय राजनीति और मतभेद की वजह से छोटी-छोटी बातों पर सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाला जाता है | इसके कारण मा० सदन का मूल्यवान समय बेकार चला जाता है | सदन का प्रत्येक पल जनता के हित के लिए समर्पित होना चाहिये, राजनीतिक मुद्दों का स्थान नहीं होना चाहिये| यदि इसमें दलगत राजनीति के कारण व्यवधान होता है तो न केवल जनता के धन का अपव्यय होता है बल्कि जन विश्वास को ठेस भी पहुँचती है | मैं विश्वास करती हूँ कि मा० सदन के सम्मानित सदस्य दलीय राजनीति से ऊपर उठकर रहेंगे | हम सभी का प्रयास होना चाहिये कि यहाँ का हर क्षण जनता के कल्याण, उत्थान और विकास को समर्पित हो | किसी मुद्दे पर किसी तरह के मतभेद और विवाद की स्थिति में उचित यह होगा कि विभिन्न दलों के नेता आपस में बैठकर विचार-विमर्श कर लें ताकि जनता को यह अहसास हो कि उसकी समस्याओं को लेकर हम पूरी तरह से गम्भीर हैं | सदन में सबको विशेषकर नये सदस्यों को अपनी बात रखने के लिए मौका मिलना चाहिए | बहुत से नये सदस्य संकोच के कारण अपनी बात सामने रखने में परहेज करते हैं, इन सदस्यों को भी अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है और मैं मानती हूँ कि इसका पहला अधिकार नये सदस्यों को ही मिलना चाहिए | नये सदस्यों को भी चाहिए कि वह संकोच न करें | हो सकता है कि शुरू में उनसे कुछ भूलें या गल्तियां हों | लेकिन वरिष्ठ सदस्यों को उनकी भूलों को ठीक करने व उनको मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए | इस विधान सभा के वर्तमान सदस्यों में से जो लोग पहले भी सदस्य रह चुके हैं वह सदन की कार्यप्रणाली को अच्छी तरह से जानते हैं | लेकिन पहली बार मा० सदस्य के रूप में जो मा० सदस्य चुन कर आये हैं उन्हें शायद इसकी पूरी जानकारी न हो | जन अपेक्षाओं को पूरा करने और इस सदन के माध्यम से लोगों की समस्याओं के प्रभावी निराकरण के लिए यह जरूरी है कि आपको इस सदन की कार्यप्रणाली और नियमों के बारे में समुचित जानकारी हो | इसी उद्देश्य से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है | प्रश्नों के माध्यम से आप जन समस्याओं, लोक महत्व के विषयों पर, चर्चा के लिए, कार्यस्थगन प्रस्तावों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों आदि को सदन के समक्ष रख सकते हैं | आपको यह जानकारी भी होनी आवश्यक है कि व्यवस्था का सवाल और चर्चा का सवाल किस तरह से उठाया जा सकता है और किस प्रकार के मामलों में उठाया जा सकता है | इसके लिये विधान सभा की 'प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली' व मा० अध्यक्ष द्वारा जारी प्रक्रिया संबंधी निदेशों का पूर्ण ज्ञान होना अति आवश्यक है | कार्यक्रम के दौरान आपको विभिन्न वक्ताओं द्वारा विभिन्न विषयों पर जानकारी दी जायेगी | आपके उपयोग के लिये विधान सभा सचिवालय द्वारा हैण्ड बुक भी प्रकाशित कराई गई है, जिनमें इन विषयों पर बहुत उपयोगी जानकारी उपलब्ध है | विधान सभा पुस्तकालय में भी सदन की प्रक्रियाओं आदि विषयों पर बहुत उपयोगी पुस्तकें और साहित्य उपलब्ध हैं, जिसका नये सदस्यों को पूरा लाभ उठाना चाहिये | इसके साथ ही पूर्व में इस मा० सदन की गरिमा बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण भाषणों को देखकर यह सीखा जा सकता है कि सदन में जन हित के मामलों को किस प्रकार से सामने रखा जाना चाहिये | एक बात मैं विशेष रूप से मा० अध्यक्ष महोदय के पद की गरिमा के बारे में कहना चाहती हूँ | सदन के मा० अध्यक्ष की गरिमा का पूरा ख्याल रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बनती है | वह सदन की सबसे उच्च कुर्सी पर बैठते हैं | सदन में अनुशासन बनाए रखने की उनकी जिम्मेदारी है | इसलिए उनकी व्यवस्थाओं को स्वीकार किया जाना चाहिए | प्रदेश में कई तरह की समस्यायें मौजूद हैं और कुछ नई समस्यायें भी हमारे सामने आएंगी, इन सबको चुनौती मानकर स्वीकार करना होगा और उनका समुचित हल निकालना होगा | मैं विश्वास करती हूँ कि इसमें अतीत के अनुभव हमारे मार्गदर्शक होंगे और जो नई समस्यायें हमारे सामने आएंगी उनका समाधान हम सबको अपनी रचनात्मक प्रतिभा से मिलजुलकर तलाश करना होगा | मैं विश्वास करती हूँ कि इसमें सदन के सभी मा० सदस्य अपना सकारात्मक योगदान देंगे | इस गरिमापूर्ण सदन का सदस्य होने के नाते आपको सदन में अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है और कई विशेष अधिकार भी प्राप्त हैं लेकिन उन विशेष अधिकारों का दुरूपयोग नहीं किया जाना चाहिये | अक्सर देखने में आता है कि मा० सदस्य बहुत छोटी -छोटी बातों पर उत्तेजित हो जाते हैं और उनका आचरण सदन की गरिमा के अनुकूल नहीं रह पाता है | आपका प्रयास होना चाहिये कि सदन के अन्दर व सदन के बाहर आपका आचरण मर्यादित व संयमित हो, ताकि आप लोकतंत्र के सजग प्रहरी के रूप में सार्थक भूमिका निभा सकें | मैं आपको विश्वास दिलाती हूँ कि आपकी दुख तकलीफ को पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से सुना जायेगा | आपके क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने की हर संभव कोशिश की जायेगी| समस्याओं से संबंधित जो भी आपके द्वारा पत्र दिए जायेंगे उन पर हमारे कार्यालय द्वारा तत्काल कार्यवाही की जाएगी और विधायक कोष्ठक द्वारा आपके पत्रों पर भी की गई कार्यवाही की समीक्षा बराबर की जाएगी | मुझे विश्वास है कि सभी सम्मिलित प्रयासों से हम प्रदेश की समस्याओं का समाधान करने और उसे लगातार विकास के नये शिखर की ओर ले जाने में सफल होंगे तथा सर्व जन हिताय, सर्व जन सुखाय के संकल्प को पूरा करेंगे | मैं अन्त में आप सबका इस प्रबोधन कार्यक्रम में स्वागत करती हूँ |

 

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