स्वागत
भाषण
(मा0 श्री
सुखदेव राजभर,
अध्यक्ष, उत्तर
प्रदेश विधान सभा)
आज १५वीं विधान
सभा के प्रथम बार
निर्वाचित मा०
सदस्यगण के लिए
दो दिवसीय प्रबोधन
कार्यक्रम आयोजित
किया गया है | इस प्रबोधन
कार्यक्रम के उद् घाटन
समारोह में उपस्थित
माननीया मुख्यमंत्री
सुश्री बहन कुमारी
मायावती जी, छत्तीसगढ़
विधान सभा के अध्यक्ष
माननीय प्रेम प्रकाश
पाण्डेय जी, माननीय
संसदीय कार्यमंत्री
वर्मा जी, माननीय
ग्राम्य विकास
मंत्री जी, विधान
सभा के प्रमुख
सचिव राजेन्द्र
प्रसाद पाण्डेय
जी और छत्तीसगढ़
विधान सभा के सचिव
देवेन्द्र वर्मा
जी और अन्य हमारे
सम्मानित नवनिर्वाचित
विधान सभा के सदस्यगण,
मीडिया के साथी
और सहयोगी कर्मचारीगण,
हमारे विधान सभा
सचिवालय के कर्मचारीगण
| संसद
और राज्य विधान
मण्डल भारत की
राजनीतिक व्यवस्था
के सर्वोच्च निकाय
हैं | इन सदनों की स्वतंत्रता
और उसकी गरिमा
बनाये रखने का
दायित्व निर्वाचित
जन-प्रतिनिधियों
पर है | जनता हमसे यह अपेक्षा
करती है कि हम अपने
आचरण से, अपने कर्त्तव्यों
और दायित्वों के
निर्वहन से सदन
की गरिमा सदैव
बनाए रखेंगे |
हमारे प्रजातंत्र
का भविष्य हमारे
इस आचरण पर निर्भर
करता है कि हम किस
प्रकार से अपने
उत्तरदायित्वों
और कर्त्तव्यों
का निर्वहन करते
हैं | विधायक, जनप्रतिनिधि
के रूप में ऐसा
व्यक्ति होता है
जो सदन में बैठकर
संसदीय कार्यों
को संपादित करता
है, अपने विधान
सभा क्षेत्र से
लेकर देश एवं प्रदेश
के हित में कार्य
करता है और चुनावों
के समय अपनी ओर
से एवं अपने दल
की ओर से मतदाताओं
से किये गये वादों
को पूरा करने का
प्रयास करता है
| मैं
चाहूँगा कि जनता
के कल्याण के लिए
आप लोग अपने अधिकारों
का समुचित उपयोग
करें और अपने उत्तरदायित्वों
का ठीक प्रकार
से निर्वहन करें
|
संसदीय शिष्टाचार,नियमों
एवं परिपाटियों
की अवहेलना के
कारण सदन में अव्यवस्था
उत्पन्न होती है
| सदन
में आरोप-प्रत्यारोप,
शोर-शराबा, नारेबाजी,
अध्यक्ष आसन की
अवहेलना, सदन के
वेल में धरना, अध्यक्ष
के मंच पर चढ़ जाना,
कागजों की छीना-झपटी
एवं बार-बार कार्यवाही
का स्थगन ऐसे आंतरिक
दॄष्य, लोकतंत्र
में आस्था रखने
वालों के लिये
गम्भीर चिन्ता
के विषय हैं | मैं आशा करता
हूँ कि सदस्यगण
सदन की गरिमा को
बनाए रखने में
पूर्ण सहयोग करेंगे
|
देश की संसद
एवं राज्यों की
विधान सभाओं
की प्रक्रिया
तथा कार्य-संचालन
नियमावली होती
है | सदन
के अन्दर सदस्यों
से इन नियमों के
पालन की अपेक्षा
की जाती है | एक प्रभावशाली
विधायक होने के
लिये उसे अपने
शिष्ट, सदाचारी
तथा सहनशील व्यवहार
के साथ दूसरों
को सुनने और समझने
की क्षमता भी रखनी
चाहिए | इसलिए यह महत्वपूर्ण
है कि सदन के नियमों
एवं प्रक्रियाओं
का पालन करते हुए
सदन में हमें कैसा
आचरण करना चाहिए,
किस प्रकार सही
तथ्यों के आधार
पर ठोस तर्क देकर
अपनी बात सदन में
रखनी चाहिए, जो
जन कल्याण में
हो, अपने व्यक्तिगत
स्वार्थ के लिए
न हो | इसे हम प्रक्रिया
संबंधी नियमों
और परम्पराओं का
अध्ययन करके ही
भली-भांति उठा
सकते हैं |
प्रजातंत्र में
विधान सभा और विधायकों
की अहम भूमिका
होती है | विधायिका महत्वपूर्ण
विषयों जैसे प्रस्ताव,
प्रश्न, अविलम्बनीय
लोक महत्व के विषयों,
समितियों आदि के
माध्यम से कार्यपालिका
को लोक कल्याण
के कार्य को करने
के लिए निर्देशित
करती है | लोकमत को प्रकट
करने और लोकमत
का निर्माण करने
के साधनों के रूप
में विधायिका महत्वपूर्ण
भूमिका निभाती
है |
विधान सभा
की कार्यपद्धति
में नियमों तथा
परम्पराओं का विशेष
महत्व और योगदान
होता है, जो मा०
सदस्य पहली बार
विधान सभा में
चुनकर आते हैं
उन्हें विधान सभा
की कार्यप्रणाली,
परम्पराओं तथा
नियमों की जानकारी
कराना, विधायिका
के कार्य को सुचारू
ढंग से सम्पन्न
कराने की दॄष्टि से भी आवश्यक
है |
आज के कार्यक्रम
में मैंने जिन
विषयों पर सम्बोधन
के लिये सम्मानित
वक्तागणों को बुलाया
है उनमें हैं- संसदीय
प्रश्न, संसदीय
विशेषाधिकार, लोक
महत्व की सूचनाओं
पर चर्चा, कार्य
स्थगन एवं ध्यानाकर्षण
प्रस्ताव, आय-व्ययक
के पारण की प्रक्रिया, संसदीय शिष्टाचार,
सदन में प्रस्तुत
किये जाने वाले
प्रस्ताव एवं संकल्प,
विधान निर्माण
प्रक्रिया तथा
संसदीय समितियां
(वित्तीय एवं गैर
वित्तीय) | इन विषयों
पर विद्वान वक्तागणों
के विचारों को
यदि आप आत्मसात
करने में सफल होते
हैं तो मुझे विश्वास
है कि सदन में अपनी
समस्याओं को नियमों
के अन्तर्गत रहते
हुए शिष्टाचारपूर्वक
उठाने में आपको
कोई कठिनाई नहीं
होगी |
मुझे अत्यधिक
प्रसन्नता हो रही
है कि आज के इस प्रबोधन
कायर्क्रम का उद् घाटन
हमारी लोकप्रिय
मा० मुख्यमंत्री
सुश्री
कुमारी मायावती
जी करने जा रही
हैं | मैं उनका हार्दिक
अभिनन्दन करता
हूँ | माननीया मुख्यमंत्री
जी की लोकिप्रयता
से हम सभी लोग परिचित
हैं | उनकी लोकप्रियता
का अंदाजा इसी
तथ्य से लगाया
जा सकता है कि उनके
मार्गदर्शन में
तेरह वर्षो के
पश्चात् उत्तर प्रदेश
की विधान सभा में
बहुजन समाज पार्टी
को स्पष्ट बहुमत
प्राप्त हुआ है
और उत्तर प्रदेश
के इतिहास में
वे पहली मुख्यमंत्री
है जिन्होंने चौथी
बार मुख्यमंत्री
बनकर उत्तर प्रदेश
में एक नया कीर्तिमान
स्थापित किया है
| मैं
एक बार पुनः माननीया
मुख्यमंत्री का
हार्दिक अभिनन्दन
करता हूँ |
इस प्रबोधन कार्यक्रम में सम्मिलित सभी महानुभावों का मैं स्वागत करता हूँ और मुझे विश्वास है कि इस प्रकार के प्रबोधन कार्यक्रमों से विधान सभाओं में न केवल चर्चाओं का स्तर सुधरेगा वरन विधायी कार्यो का निष्पादन भी सुचारु एवं व्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा | इन्हीं शब्दों के साथ मैं सभी साथियों का धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ |
.BACK .